लिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसपर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर दीजिए।…

2023

लिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसपर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर दीजिए।

मनुष्य ज्यों ही समाज में प्रवेश करता है. उसके सुख और दुःख का बहुत सा अंश दूसरे की क्रिया या अवस्था पर अवलंबित हो जाता है। उसके मनोविकारों के प्रवाह तथा जीवन के विस्तार के लिए अधिक क्षेत्र हो जाता है। वह दसरों के दुःख से दुखी और दुसरो सुख से सुखी होने लगता है।
Q. दूसरों के दुःख से दुखी और सुख से सुखी होना :

Answer: D. मनोविकारों का प्रवाह हैसही उत्तर: मनोविकारों का प्रवाह है व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि जब मनुष्य समाज में प्रवेश करता है तो उसके सुख-दुःख का बहुत सा अंश दूसरों की क्रिया या…

  1. A.

    मनोविश्लेषण है

  2. B.

    अवसाद ग्रस्त होना है

  3. C.

    मनोभावों का संचयन है

  4. D.

    मनोविकारों का प्रवाह है

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Correct answer: D

सही उत्तर: मनोविकारों का प्रवाह है

व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि जब मनुष्य समाज में प्रवेश करता है तो उसके सुख-दुःख का बहुत सा अंश दूसरों की क्रिया या अवस्था पर निर्भर हो जाता है। विशेषकर पाठ में वाक्य है — 'उसके मनोविकारों के प्रवाह तथा जीवन के विस्तार के लिए अधिक क्षेत्र हो जाता है। वह दूसरों के दुःख से दुखी और दूसरों के सुख से सुखी होने लगता है।' यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि व्यक्ति के भाव और मनोविकार दूसरों के प्रभाव से प्रवाहित होते हैं।

  • क्यों यह उत्तर उपयुक्त है: पाठ में 'मनोविकारों के प्रवाह' शब्दों का प्रयोग सीधे इसी अर्थ को दर्शाता है — भावों का बहाव और दूसरों के प्रभाव से उनका परिवर्तित होना।

  • अन्य विकल्पों का संक्षिप्त खंडन: 'मनोविश्लेषण' एक चिकित्सीय/विश्लेषणात्मक प्रक्रिया है और पाठ में ऐसा कोई संकेत नहीं है; 'अवसाद ग्रस्त होना' क्लिनिकल स्थिति का संकेत देता है जबकि पाठ केवल भावनात्मक प्रभावित होने की सामान्य बात करता है; 'मनोभावों का संचयन' का आशय भावों का जमा होना है, पर पाठ भावों के प्रवाह और विस्तार का वर्णन कर रहा है।

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