शून्यकाल संसदीय प्रक्रियाओं में एक भारतीय नवाचार है और यह वर्ष _______ से…
2025
शून्यकाल संसदीय प्रक्रियाओं में एक भारतीय नवाचार है और यह वर्ष _______ से विद्यमान है।
Answer: B. 1962 — अवधारणा — शून्यकाल का उल्लेख न संविधान में है और न ही किसी सदन की प्रक्रिया-नियमावली में; यह भारतीय संसदीय व्यवहार की एक अनौपचारिक व्यवस्था है। परम्परागत रूप…
- A.
1964
- B.
1962
- C.
1960
- D.
1958
Attempted by 62 students.
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Correct answer: B
अवधारणा — शून्यकाल का उल्लेख न संविधान में है और न ही किसी सदन की प्रक्रिया-नियमावली में; यह भारतीय संसदीय व्यवहार की एक अनौपचारिक व्यवस्था है। परम्परागत रूप से यह वह अवधि है जो दोपहर 12 बजे, प्रश्नकाल समाप्त होते ही आरम्भ होती है, जिसमें कोई सदस्य औपचारिक प्रस्ताव के लिए आवश्यक पूर्व सूचना दिए बिना अत्यावश्यक लोक महत्त्व का विषय उठा सकता है। इसका नाम भी घड़ी के इसी बिंदु से पड़ा है।
अनुप्रयोग — प्रश्न यह पूछता है कि यह विशिष्ट भारतीय व्यवस्था किस वर्ष से विद्यमान है। यह प्रथा 1962 में आकार लेने लगी, जब सदस्य प्रश्नकाल के तुरंत बाद के समय का उपयोग अत्यावश्यक विषय उठाने के लिए करने लगे, और तब से यह दोनों सदनों की स्थायी विशेषता बनी हुई है। अतः रिक्त स्थान में आने वाला वर्ष 1962 है।
तुलना — प्रश्न में दिए अन्य वर्ष उस काल की भिन्न घटनाओं से जुड़े हैं:
वर्ष | सम्बद्ध घटना |
|---|---|
1958 | संसद द्वारा सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम पारित |
1960 | बम्बई राज्य का महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजन |
1962 | प्रश्नकाल के बाद की प्रथा के रूप में शून्यकाल का उदय |
1964 | नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्री बनना |
लोकसभा में प्रश्नकाल आज भी बैठक के आरम्भिक घंटे में — प्रातः 11 से दोपहर 12 बजे तक — चलता है और प्रक्रिया-नियमावली से संचालित होता है, जबकि शून्यकाल ठीक वहीं से आरम्भ होता है और किसी नियम से बँधा हुआ नहीं है; राज्यसभा में 2014 में इन दोनों का क्रम बदल दिया गया, अतः वहाँ शून्यकाल प्रश्नकाल से पहले लिया जाता है। मानक राजव्यवस्था सामग्री — राज्यसभा सचिवालय की शून्यकाल एवं विशेष उल्लेख सम्बन्धी पुस्तिका तथा प्रचलित राजव्यवस्था अध्ययन सामग्री — इस भारतीय नवाचार का आरम्भ 1962 से मानती है।