गोस्वामी तुलसीदास का निधन वाराणसी के किस घाट पर हुआ?
20172021
गोस्वामी तुलसीदास का निधन वाराणसी के किस घाट पर हुआ?
- A.
राम घाट
- B.
अस्सी घाट
- C.
मणिकर्णिका घाट
- D.
दशाश्वमेध घाट
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Correct answer: B
अवधारणा: मध्यकालीन भक्ति-काल के संत-कवियों के जीवनकाल की तिथियाँ और स्थान प्रायः उनकी अपनी रचनाओं में उल्लिखित दोहों और जीवनी-साक्ष्यों से प्रामाणिक माने जाते हैं — गोस्वामी तुलसीदास के निधन-स्थान का प्रमाण भी ऐसे ही एक प्रचलित दोहे में मिलता है।
अनुप्रयोग: तुलसीदास से संबंधित प्रसिद्ध दोहा है — "संवत सोलह सौ असी, असी गंग के तीर। श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर।।" अर्थात संवत 1680 (सन् 1623) में श्रावण शुक्ल सप्तमी को गंगा के तट पर अस्सी घाट पर तुलसीदास ने शरीर त्यागा। यही दोहा निधन-स्थान के रूप में अस्सी घाट को प्रमाणित करता है।
सत्यापन: विभिन्न ऐतिहासिक जीवनी-स्रोत भी पुष्टि करते हैं कि तुलसीदास ने अपने अंतिम वर्ष वाराणसी के अस्सी घाट पर बिताए, जहाँ आज भी उनसे जुड़ा स्मारक/समाधि-स्थल स्थित है।
राम घाट — यह घाट नाम में तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के कारण भ्रामक लग सकता है, किंतु किसी ऐतिहासिक स्रोत में इसे उनके निधन-स्थान के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया है।
मणिकर्णिका घाट — यह वाराणसी का सबसे प्रमुख दाह-संस्कार घाट है, इसलिए इसे मृत्यु से जोड़ना स्वाभाविक लग सकता है, परंतु तुलसीदास के निधन का कोई अभिलेख इस घाट से नहीं जुड़ा।
दशाश्वमेध घाट — यह वाराणसी की गंगा आरती के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध और केंद्रीय घाट है, पर इसका तुलसीदास के निधन से कोई ऐतिहासिक संबंध दर्ज नहीं है।
अतः उपर्युक्त दोहे व जीवनी-साक्ष्यों के आधार पर सही उत्तर अस्सी घाट है।