‘छत से ईंट गिरी’ वाक्य में कौन-सा कारक है ?

2016

‘छत से ईंट गिरी’ वाक्य में कौन-सा कारक है ?

Answer: A. अपादानअवधारणा: कारक संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है जिससे वाक्य में उसका क्रिया के साथ संबंध प्रकट होता है, और प्रत्येक कारक की पहचान उसके विभक्ति चिह्न (परसर्ग) से…

  1. A.

    अपादान

  2. B.

    सम्बन्ध

  3. C.

    अधिकरण

  4. D.

    सम्प्रदान

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Correct answer: A

अवधारणा: कारक संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है जिससे वाक्य में उसका क्रिया के साथ संबंध प्रकट होता है, और प्रत्येक कारक की पहचान उसके विभक्ति चिह्न (परसर्ग) से होती है। जहाँ किसी स्थिर वस्तु, स्थान या व्यक्ति से अलगाव, पृथक्ता, निकलने या दूरी का भाव प्रकट हो, वहाँ लगा हुआ ‘से’ परसर्ग अपादान कारक का सूचक होता है।

प्रयोग:

  1. प्रस्तुत वाक्य है — ‘छत से ईंट गिरी’। इसमें क्रिया ‘गिरी’ है और उस क्रिया का कर्ता ‘ईंट’ है।

  2. क्रिया से प्रश्न कीजिए — ‘ईंट कहाँ से गिरी ?’ उत्तर मिलता है — ‘छत से’। अतः जिस पद का कारक जाँचना है, वह ‘छत’ है और उस पर ‘से’ परसर्ग लगा है।

  3. ‘छत’ एक स्थिर आधार है और ‘ईंट’ उससे अलग होकर नीचे आती है। यहाँ ‘से’ अलगाव (पृथक्ता) का भाव दे रहा है, साधन का नहीं। स्थिर वस्तु से अलगाव का यही भाव अपादान कारक का लक्षण है, इसलिए इस वाक्य में अपादान कारक है।

विभेद एवं जाँच:

  • सम्बन्ध कारक का चिह्न ‘का/के/की’ है और वह एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा से नाता जोड़ता है — जैसे ‘छत का किनारा’।

  • अधिकरण कारक का चिह्न ‘में/पर’ है और वह क्रिया के आधार या स्थान को बताता है — जैसे ‘छत पर ईंट रखी है’।

  • सम्प्रदान कारक का चिह्न ‘को/के लिए’ है और वह उस पात्र को बताता है जिसे कुछ दिया जाए या जिसके लिए कार्य हो — जैसे ‘मजदूर के लिए ईंट लाओ’।

  • करण कारक भी ‘से’ परसर्ग लेता है, किंतु वह साधन बताता है — जैसे ‘ईंट से दीवार बनी’। प्रस्तुत वाक्य में ‘से’ साधन नहीं, अलगाव सूचित कर रहा है, अतः यहाँ अपादान कारक ही सिद्ध होता है।

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