अधिगम का कौन-सा मत इस बात में विश्वास रखता है कि मौखिक या अमौखिक भाषा आदत…

2024

अधिगम का कौन-सा मत इस बात में विश्वास रखता है कि मौखिक या अमौखिक भाषा आदत निर्माण की प्रक्रिया के माध्यम से आती है?

Answer: B. व्यवहारवादी (बिहेवियरिस्ट)अधिगम के सिद्धान्त इस आधार पर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं कि प्रत्येक सिद्धान्त किस तंत्र को मूलभूत मानता है। कुछ सिद्धान्त केवल प्रेक्षणीय घटनाओं—एक उद्दीपक,…

  1. A.

    उपयोगितावादी (फंक्शनलिस्ट)

  2. B.

    व्यवहारवादी (बिहेवियरिस्ट)

  3. C.

    संज्ञानात्मकवादी

  4. D.

    अन्तःक्रियात्मकवादी

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Correct answer: B

अधिगम के सिद्धान्त इस आधार पर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं कि प्रत्येक सिद्धान्त किस तंत्र को मूलभूत मानता है। कुछ सिद्धान्त केवल प्रेक्षणीय घटनाओं—एक उद्दीपक, उससे उत्पन्न अनुक्रिया और उसके बाद आने वाले परिणाम—को स्वीकार करते हैं; अन्य सिद्धान्त आन्तरिक मानसिक संरचनाओं की परिकल्पना करते हैं; और कुछ अन्य सामाजिक आदान-प्रदान अथवा किसी उक्ति के संप्रेषणात्मक प्रकार्य को प्राथमिक मानते हैं। जहाँ भी अधिगम को उद्दीपक-अनुक्रिया संबंधों के सुदृढ़ीकरण के रूप में परिभाषित किया जाता है, वहाँ प्रत्येक अर्जित निष्पादन को, चाहे वह मौखिक हो अथवा अमौखिक, एक आदत के रूप में वर्णित किया जाता है, और आदत का निर्माण किसी प्रतिमान का अनुकरण करने, अनुक्रिया को दोहराने तथा उसका पुनर्बलन किए जाने से होता है।

प्रश्न का मूल कथन भाषा को, चाहे वह मौखिक हो अथवा अमौखिक, आदत निर्माण की प्रक्रिया—अर्थात् अनुकरण, बार-बार अभ्यास और पुनर्बलन—से उत्पन्न होने वाली बताता है। यह अधिगम के व्यवहारवादी दृष्टिकोण का परिभाषक दावा है। बी. एफ. स्किनर की पुस्तक वर्बल बिहेवियर (1957) वाक् को क्रिया-प्रसूत व्यवहार मानती है: बच्चा अपने आसपास के प्रतिमानों का अनुकरण करता है, भाषायी समुदाय सफल अनुक्रियाओं का पुनर्बलन करता है, और इस प्रकार शब्दावली तथा वाक्य-प्रतिमान अनुबंधित आदतों के रूप में स्थापित हो जाते हैं।

  • उपयोगितावादी: किसी उक्ति द्वारा पूरे किए जाने वाले उद्देश्य—अर्थात् वक्ता भाषा के माध्यम से क्या कर रहा है—को विश्लेषण की इकाई मानता है, इसलिए यह रूपों को इस आधार पर वर्गीकृत करता है कि उनका संप्रेषणात्मक प्रकार्य क्या है, न कि इस आधार पर कि उनका अभ्यास किस प्रकार कराया गया था।

  • संज्ञानात्मकवादी: परिपक्व होती मानसिक संरचनाओं को प्राथमिक मानता है—शब्द का उपयोग किए जाने से पहले संकल्पना का उपलब्ध होना आवश्यक है—इसलिए भाषा पुनर्बलित अभ्यास के बजाय सामान्य संज्ञानात्मक विकास का अनुसरण करती है।

  • अन्तःक्रियात्मकवादी: अधिक सक्षम वक्ता के साथ आदान-प्रदान को प्राथमिक मानता है—भाषा सहारा-प्रदत्त वार्तालाप और संयुक्त अवधान से विकसित होती है—इसलिए अर्जन की प्रेरक शक्ति आदत की दृढ़ता के बजाय सामाजिक अन्तःक्रिया है।

अतः अधिगम का वह दृष्टिकोण, जो मौखिक और अमौखिक भाषा को आदत निर्माण का परिणाम मानता है, व्यवहारवादी दृष्टिकोण है।

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