नई भाषा सीखते समय, बहुत से विद्यार्थी भाषा के अद्वितीय उच्चारण संबंधी नियमों…

2023

नई भाषा सीखते समय, बहुत से विद्यार्थी भाषा के अद्वितीय उच्चारण संबंधी नियमों के कारण भाषा बोलते समय प्रायः आत्मविश्वास की कमी का सामना करते हैं । इस समस्या को दूर करने का तरीका क्या है ?

Answer: C. कक्षा में ऐसे खेलों जैसी गतिविधियों का प्रयोग किया जाए जिसमें मौखिक अन्तःक्रियाएँ अधिक हों ।अवधारणा: क्रैशन की Affective Filter परिकल्पना तथा रचनावादी, गतिविधि-आधारित शिक्षाशास्त्र यह मानते हैं कि जब कक्षा में चिंता/तनाव कम रखा जाता है, तब मौखिक भाषा…

  1. A.

    जब-जब उन्हें समस्या आए, उनकी ग़लती में सुधार किया जाए ।

  2. B.

    बच्चे कक्षा में सस्वर वाचन करें ।

  3. C.

    कक्षा में ऐसे खेलों जैसी गतिविधियों का प्रयोग किया जाए जिसमें मौखिक अन्तःक्रियाएँ अधिक हों ।

  4. D.

    काउन्सलर के साथ विशेष वाक् थेरेपी सत्र आयोजित किए जाएँ और ड्रिल के माध्यम से अभ्यास किया जाए ।

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Correct answer: C

अवधारणा: क्रैशन की Affective Filter परिकल्पना तथा रचनावादी, गतिविधि-आधारित शिक्षाशास्त्र यह मानते हैं कि जब कक्षा में चिंता/तनाव कम रखा जाता है, तब मौखिक भाषा उत्पादन सबसे तेज़ी से सुधरता है — विद्यार्थी बार-बार, स्वाभाविक, कम-जोखिम वाले, रुचिकर और गैर-आलोचनात्मक वातावरण में अभ्यास करने से बोलने में प्रवाह और आत्मविश्वास सबसे तेज़ी से प्राप्त करते हैं, न कि निरंतर सुधार, यांत्रिक अभ्यास या नैदानिक हस्तक्षेप से। अनुप्रयोग: यहाँ बताई गई समस्या अपरिचित उच्चारण नियमों के कारण बोलने में आत्मविश्वास की कमी है। कक्षा में ऐसी खेल-जैसी गतिविधियाँ जिनमें मौखिक अन्तःक्रिया अधिक हो, हर विद्यार्थी को बार-बार, आनंददायक और कम-दबाव वाले अवसर देती हैं कि वे बोलें, ध्वनियों के साथ प्रयोग करें और साथियों द्वारा समझे जाएँ — इससे सीधे तनाव कम होता है और गलत होने के डर के बजाय अभ्यास के माध्यम से बोलने का आत्मविश्वास बनता है। क्रॉस-चेक: शेष विकल्प अपने-अपने आधार पर भी असफल रहते हैं — हर ग़लती को तुरन्त सुधारना आत्म-सजगता (और डर) बढ़ाता है, घटाता नहीं; सस्वर वाचन में विद्यार्थी केवल लिखित पाठ के उच्चारण का अभ्यास करता है, इसमें स्वतःस्फूर्त, अन्तःक्रियात्मक बोलने का अभ्यास नहीं मिलता; तथा सामान्य उच्चारण-सम्बन्धी आत्मविश्वास की समस्या को नैदानिक विकार मानकर थेरेपी व ड्रिल की आवश्यकता समझना एक बेमेल, अत्यधिक औपचारिक प्रतिक्रिया है जो दबाव कम करने के बजाय बढ़ा सकती है। इसलिए गतिविधि-आधारित, अन्तःक्रिया-समृद्ध विकल्प ही मूल कारण का समाधान करता है।

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