विद्यार्थी अध्यापक द्वारा दिये गए आदर्श वाक्यों को दोहराकर भाषा के प्रतिमान…

2024

विद्यार्थी अध्यापक द्वारा दिये गए आदर्श वाक्यों को दोहराकर भाषा के प्रतिमान (पैटर्न) सीखते हैं। वे वाक्यों को कंठस्थ कर लेते हैं और सही तरीके से ड्रिल करने पर अपने अध्यापक द्वारा सकारात्मक पुनर्बलन प्राप्त करते हैं। अध्यापक द्वारा क्या किया जा रहा है?

Answer: A. श्रव्य भाषिक विधिअवधारणा: व्यवहारवादी मनोविज्ञान पर आधारित श्रव्य-भाषिक विधि (Audio-lingual Method) भाषा-अधिगम को आदत-निर्माण की प्रक्रिया मानती है। शिक्षक शुद्ध…

  1. A.

    श्रव्य भाषिक विधि

  2. B.

    सम्प्रेषणात्मक उपागम

  3. C.

    सम्पूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया

  4. D.

    संरचनात्मक उपागम

Show answer & explanation

Correct answer: A

अवधारणा: व्यवहारवादी मनोविज्ञान पर आधारित श्रव्य-भाषिक विधि (Audio-lingual Method) भाषा-अधिगम को आदत-निर्माण की प्रक्रिया मानती है। शिक्षक शुद्ध वाक्य-प्रतिमानों का नमूना प्रस्तुत करता है, शिक्षार्थी उन्हें कंठस्थ होने तक दोहराते और उनका ड्रिल-अभ्यास करते हैं तथा शिक्षक शुद्ध निष्पादन पर सकारात्मक पुनर्बलन देता है। इसमें अनुकरण और पुनरावृत्ति द्वारा भाषिक रूप पर यांत्रिक प्रभुत्व को अर्थ अथवा व्याकरण के नियमों की स्पष्ट चर्चा से अधिक महत्त्व दिया जाता है।

अनुप्रयोग: इस प्रश्न में शिक्षक नमूना वाक्य प्रस्तुत करता है, विद्यार्थी उन्हें कंठस्थ होने तक दोहराकर आत्मसात करते हैं और शुद्ध ड्रिल-अभ्यास करने पर शिक्षक से सकारात्मक पुनर्बलन प्राप्त करते हैं। नमूना-प्रस्तुतीकरण–पुनरावृत्ति–ड्रिल-अभ्यास–पुनर्बलन का यह चक्र श्रव्य-भाषिक विधि की विशिष्ट तकनीक है।

  • सम्प्रेषणात्मक उपागम (Communicative Approach) में शिक्षार्थियों द्वारा वास्तविक सम्प्रेषणात्मक कार्यों में भाषा के सार्थक प्रयोग को केंद्र में रखा जाता है, न कि शुद्धता के लिए पुरस्कार पाने हेतु शिक्षक द्वारा दिए गए नमूना वाक्यों की पुनरावृत्ति और ड्रिल-अभ्यास को।

  • सम्पूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया (Total Physical Response) में भाषिक निवेश को शिक्षार्थी द्वारा की जाने वाली शारीरिक क्रियाओं अथवा गतिविधियों से जोड़ा जाता है; इस विवरण में शारीरिक क्रिया का कोई तत्त्व नहीं है।

  • संरचनात्मक उपागम मूलतः एक पाठ्यक्रम-संगठन सिद्धांत है—पाठ्यक्रम के लिए व्याकरणिक संरचनाओं का श्रेणीकरण और क्रमबद्ध प्रस्तुतीकरण—न कि कोई विशिष्ट शिक्षण-तकनीक; यह स्वयं शुद्ध अनुक्रियाओं पर सकारात्मक पुनर्बलन के माध्यम से ड्रिल कराकर आदत-निर्माण करने का निर्देश नहीं देता, जो एक भिन्न, व्यवहारवादी शिक्षण-तकनीक की विशेषता है।

चूँकि वर्णित तकनीक में ठीक-ठीक प्रतिरूपण, पुनरावृत्ति, कंठस्थीकरण, ड्रिल-अभ्यास और शुद्ध निष्पादन पर सकारात्मक पुनर्बलन सम्मिलित हैं, इसलिए शिक्षक श्रव्य-भाषिक विधि का प्रयोग कर रहा है।

Explore the full course: Ctet Paper 2

Loading lesson…