एक बालिका अपनी भाषा कक्षा का अनुभव माँ के साथ साझा करती है और कहती है कि…

2023

एक बालिका अपनी भाषा कक्षा का अनुभव माँ के साथ साझा करती है और कहती है कि कभी-कभी हम अपनी आँखें बंद करते हैं और हमें अध्यापिका अपने बस्ते में से कोई भी वस्तु निकालने के लिए कहती हैं। फिर हमें उस वस्तु के बारे में बताना होता है। यह सीखने का बहुत अच्छा तरीका है।

बच्चे की यह टिप्पणी अधिगम के बारे में बच्चे की प्राथमिकता की ओर संकेत करती है। उसकी प्राथमिकता की पहचान कीजिए:

Answer: A. जब मैं कुछ करती हूँ तो भाषा प्रयोग अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ।अवधारणा: एडगर डेल के अनुभव शंकु (Cone of Experience) के अनुसार सीखने के अनुभवों को मूर्त (concrete) से अमूर्त (abstract) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है — एक…

  1. A.

    जब मैं कुछ करती हूँ तो भाषा प्रयोग अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ।

  2. B.

    मैं जब सुनती हूँ तो भाषा प्रयोग अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ।

  3. C.

    जब मैं देख कर नकल करती हूँ तो भाषा प्रयोग अधिक अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ।

  4. D.

    मैं जब देखती हूँ तो भाषा प्रयोग अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ।

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Correct answer: A

अवधारणा: एडगर डेल के अनुभव शंकु (Cone of Experience) के अनुसार सीखने के अनुभवों को मूर्त (concrete) से अमूर्त (abstract) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है — एक छोर पर प्रत्यक्ष, उद्देश्यपूर्ण अनुभव (स्वयं करके सीखना) है, बीच में प्रेक्षण द्वारा सीखना (देखकर सीखना) है, और दूसरे छोर पर मौखिक प्रतीकों के माध्यम से सीखना (सुनकर/पढ़कर सीखना) है। सामान्यतः प्रत्यक्ष, हाथों-हाथ अनुभव को समझने और याद रखने की दृष्टि से अधिक प्रभावी माना जाता है, जबकि केवल सुनना या केवल देखना तुलनात्मक रूप से अधिक अमूर्त अनुभव प्रदान करता है।

अनुप्रयोग: दी गई परिस्थिति में बालिका अध्यापिका के निर्देश पर अपनी आँखें बंद करके अध्यापिका के बस्ते में से किसी वस्तु को स्वयं निकालती है, उसे स्पर्श करके पहचानती है और फिर उसके बारे में बताती है। निर्देश सुनना गतिविधि की शुरुआत भर है; आँखें बंद रहने के कारण गतिविधि के मुख्य भाग में देखने की कोई भूमिका नहीं है, और भाषा-प्रयोग की मुख्य पहचान वस्तु को हाथ से उठाने व स्पर्श करके महसूस करने, यानी स्वयं करने से होती है, जो डेल के शंकु में सबसे प्रत्यक्ष अनुभव के स्तर से मेल खाती है। अतः बालिका की प्राथमिकता क्रियात्मक रूप से 'करके सीखने' (doing) की है।

तुलना: शेष विकल्पों में वर्णित शैलियाँ इस गतिविधि पर लागू नहीं होतीं:

  • सुनकर सीखने की शैली के लिए किसी ध्वनि या वार्तालाप को सुनना आवश्यक है, परन्तु इस गतिविधि में सुनने की भूमिका केवल आरंभिक निर्देश तक सीमित है, मुख्य कार्य तक नहीं।

  • देखकर नकल करने की शैली के लिए किसी क्रिया को देखना आवश्यक है, परन्तु आँखें बंद होने के कारण देखकर नकल करना संभव नहीं है।

  • केवल देखकर सीखने की शैली भी दृष्टि पर निर्भर है, जबकि इस गतिविधि में वस्तु को देखा नहीं जाता, केवल स्पर्श से पहचाना जाता है।

निष्कर्ष: स्पर्श और क्रिया द्वारा वस्तु को पहचानना तथा वर्णन करना — अर्थात 'करके सीखना' — ही बालिका की अधिगम प्राथमिकता को सही ढंग से दर्शाता है, जो विकल्प 'जब मैं कुछ करती हूँ तो भाषा प्रयोग अच्छी तरह से याद कर लेती हूँ' में व्यक्त हुआ है।

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