निर्देश : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…

2023

निर्देश : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

आया समय, उठो तुम नारी,
युग-निर्माण तुम्हें करना है ।
आज़ादी की खुदी नींव में,
तुम्हें प्रगति पत्थर भरना है ।
अपने को कमज़ोर न समझो,
जननी हो संपूर्ण जगत की, गौरव हो ।

कविता का मुख्य स्वर है :

Answer: C. स्त्री-शक्तिकिसी काव्यांश का 'मुख्य स्वर' (केंद्रीय भाव) पहचानने के लिए यह देखा जाता है कि कवि पूरी रचना में किसे संबोधित कर रहा है, उसे कौन-सा संदेश दे रहा है, और समूची…

  1. A.

    गौरव गाथा

  2. B.

    युग-निर्माण

  3. C.

    स्त्री-शक्ति

  4. D.

    स्वतंत्रता

Attempted by 7 students.

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Correct answer: C

किसी काव्यांश का 'मुख्य स्वर' (केंद्रीय भाव) पहचानने के लिए यह देखा जाता है कि कवि पूरी रचना में किसे संबोधित कर रहा है, उसे कौन-सा संदेश दे रहा है, और समूची रचना किस भावना या विचार के इर्द-गिर्द केंद्रित है। किसी एक बार आए शब्द, सौंपे गए किसी एक विशिष्ट कार्य, या पृष्ठभूमि के संदर्भ को मुख्य भाव नहीं माना जाता, बल्कि पूरे काव्यांश में व्याप्त अंतर्निहित भाव को माना जाता है।

प्रस्तुत काव्यांश में कवि आरंभ से अंत तक सीधे 'नारी' को संबोधित करता है — 'उठो तुम नारी', 'अपने को कमज़ोर न समझो', 'जननी हो संपूर्ण जगत की, गौरव हो'। युग-निर्माण और प्रगति का कार्य नारी को उसकी अंतर्निहित सामर्थ्य पहचानने के आह्वान के रूप में सौंपा गया है। अतः पूरे काव्यांश का केंद्रीय भाव नारी की शक्ति और सामर्थ्य पर टिका है।

  • "गौरव गाथा" — "गौरव" शब्द केवल अंतिम पंक्ति में एक विशेषण के रूप में आता है; काव्यांश किसी बीती हुई उपलब्धि की गाथा नहीं सुनाता, बल्कि भविष्य के लिए सीधा आह्वान करता है, अतः यह मुख्य स्वर नहीं कहा जा सकता।

  • "युग-निर्माण" — यह नारी को सौंपा गया एक विशिष्ट कार्य है, संपूर्ण काव्यांश का भाव नहीं; कार्य स्वयं नारी की अंतर्निहित शक्ति की अभिव्यक्ति है, केंद्रीय भाव नहीं।

  • "स्वतंत्रता" — "आज़ादी की खुदी नींव" केवल पृष्ठभूमि/संदर्भ के रूप में आता है; काव्यांश का केंद्र स्वतंत्रता की चर्चा नहीं, नारी को दिया गया संबोधन है।

  • "स्त्री-शक्ति" — पूरा काव्यांश नारी को संबोधित है, उसे कमज़ोर न मानने और अपनी सामर्थ्य पहचानने का आह्वान करता है; यही इसका केंद्रीय, व्यापक भाव है।

अतः काव्यांश का मुख्य स्वर 'स्त्री-शक्ति' है।

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