निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…

2023

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अपने स्वार्थ या संस्कृति के कारण सामान्य व्यवहार में हम कितनी ही बार सबसे धन्यवाद बोलते हैं । तो यह कृतज्ञता सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित क्यों ? हमें मानव जन्म देने वाले ईश्वर के लिए और जलवायु, भोजन, ऊर्जा जैसे बहुत सारे उपहार देने वाली प्रकृति के लिए भी क्यों नहीं ? हम ईश्वर से संवाद करें कि वह हमारे हृदय में पवित्रता, सद्गुणों के प्रकाश को आलोकित करें । दुखों के कारण तो हमारे विकार हैं, बुराइयाँ हैं । हर बुराई अज्ञान के अंधकार में फैलती है, प्रकाश होते ही उसका सामर्थ्य खत्म हो जाता है । सुख-दुख दोनों ही हमारे कर्मों के फल हैं । हमें समझना चाहिए कि बिना दुख भोगे, सुख नहीं पाया जा सकता है । मानवीय पुरुषार्थ करते रहें, मन की कोठरी को स्वच्छ रखें, जहाँ ज़रूरत हो, प्रायश्चित भी अवश्य करें । कौन जाने कब किस रूप में प्रभु किस माध्यम से सहायक हो जाएँ । ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना एक ऐसा अचूक तरीका है जो हमें असंतुष्टि और ईर्ष्या जैसी निकृष्ट बातों से ऊपर उठाता है और यही हमारे जीवन का मूलभूत लक्ष्य है।

'हर बुराई अज्ञान के अंधकार में फैलती है ।' से तात्पर्य है :

Answer: D. अज्ञानता के कारण बुराइयाँ फैलती हैं ।अवधारणा: गद्यांश-आधारित प्रश्नों में किसी वाक्य के अर्थ को समझने के लिए शब्दों को उनके शाब्दिक अर्थ में नहीं, बल्कि गद्यांश में प्रयुक्त सन्दर्भ और रूपक के…

  1. A.

    अज्ञानी व्यक्ति बुराइयाँ फैलाता है ।

  2. B.

    अँधेरा होते ही बुराइयाँ फैल जाती हैं ।

  3. C.

    अँधेरा सब बुराइयों की जड़ है ।

  4. D.

    अज्ञानता के कारण बुराइयाँ फैलती हैं ।

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Correct answer: D

अवधारणा: गद्यांश-आधारित प्रश्नों में किसी वाक्य के अर्थ को समझने के लिए शब्दों को उनके शाब्दिक अर्थ में नहीं, बल्कि गद्यांश में प्रयुक्त सन्दर्भ और रूपक के अनुसार समझना आवश्यक है।

प्रयोग: दिए गए गद्यांश में 'अंधकार' शब्द शारीरिक/भौतिक अंधेरे के लिए नहीं, बल्कि 'अज्ञान' (ज्ञान की कमी) के रूपक के रूप में प्रयुक्त हुआ है — जैसा कि आगे की पंक्ति 'प्रकाश होते ही उसका सामर्थ्य खत्म हो जाता है' से भी स्पष्ट होता है, क्योंकि यहाँ 'प्रकाश' स्वाभाविक रूप से 'ज्ञान' का रूपक है। अतः 'हर बुराई अज्ञान के अंधकार में फैलती है' पंक्ति का तात्पर्य है कि बुराइयाँ अज्ञानता के कारण फैलती हैं।

तुलना:

  • 'अज्ञानी व्यक्ति बुराइयाँ फैलाता है' — यह कथन बुराई फैलाने का कर्ता किसी विशेष अज्ञानी व्यक्ति को बनाता है, जबकि गद्यांश की पंक्ति व्यक्ति की नहीं, बल्कि अज्ञान नामक अमूर्त दशा की बात करती है।

  • 'अँधेरा होते ही बुराइयाँ फैल जाती हैं' — यह कथन 'अंधकार' को समय-सापेक्ष भौतिक घटना (रात होने) के रूप में लेता है, जबकि गद्यांश में इसका प्रयोग भौतिक न होकर रूपक के रूप में हुआ है।

  • 'अँधेरा सब बुराइयों की जड़ है' — यह भी 'अंधकार' को भौतिक अर्थ में लेकर उसे समस्त बुराइयों का मूल स्रोत घोषित करता है, जबकि गद्यांश केवल यह कहता है कि बुराई अज्ञान की दशा में फैलती है, अंधकार के 'जड़' होने की बात नहीं करता।

परिणाम: अतः जो कथन बुराई के फैलने का कारण अज्ञानता को बताता है, वही गद्यांश की पंक्ति के आशय से पूर्णतः मेल खाता है।

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