निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का…
2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इच्छा से प्रेरित होकर लोग उन्नति के मार्ग पर चलने लगते हैं। अपनी यात्रा के आरंभ में वे अपनी प्रगति में बाधा डालने वाली सैकड़ों व्यक्तिगत और सामाजिक खामियों का पता लगाते हैं। उन आदिमानवों ने सुख प्राप्त करने की अपनी सहज इच्छा से प्रेरित होकर भी इन खामियों के खिलाफ संघर्ष किया। हालाँकि प्रगति प्राप्त करने के लिए कोई व्यवस्थित तरीका उपलब्ध न होने के कारण वे बहुत कमजोर थे।
मानव अस्तित्व त्रिपक्षीय है - भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक। अपनी यात्रा के प्रारंभिक चरण में सुदूर अतीत के अंधेरे युग में मानव ने अकेले भौतिक और मानसिक क्षेत्रों में प्रगति की। मानव संरचना में रूपात्मक परिवर्तन अब भी हो रहे हैं और भविष्य में भी होंगे। मनुष्य भविष्य में ऐसे उल्लेखनीय परिवर्तनों से गुजरेगा जो आज के लोगों के लिए लगभग अपरिचित होंगे। हम यह नहीं कह सकते कि उन आरंभिक मनुष्यों ने वास्तव में कोई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रगति की थी। हालाँकि उन्होंने जो भी उन्नति की, वह किसी भी तरह से महत्वहीन नहीं थी।
विशेषण-विशेष्य का उदाहरण नहीं है :
Answer: C. मानव अस्तित्व — अवधारणाविशेषण (Adjective) वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता — गुण, अवस्था, परिमाण या संख्या — बताता है और सामान्यतः रूप, ईय, इक, आत्मक, मय, वान जैसे…
- A.
रूपात्मक परिवर्तन
- B.
अँधेरे युग
- C.
मानव अस्तित्व
- D.
आध्यात्मिक दुनिया
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Correct answer: C
अवधारणा
विशेषण (Adjective) वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता — गुण, अवस्था, परिमाण या संख्या — बताता है और सामान्यतः रूप, ईय, इक, आत्मक, मय, वान जैसे प्रत्ययों से बनता है अथवा स्वयं मूल रूप से गुणवाचक होता है। जब कोई मूल रूप से संज्ञा शब्द किसी अन्य संज्ञा से पहले आकर केवल संबंध या वर्ग बताता है (गुण नहीं), तो वह संज्ञा-संज्ञा (सामासिक) संरचना बनाता है, विशेषण-विशेष्य पद नहीं।
प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण
रूपात्मक परिवर्तन: 'रूपात्मक' शब्द 'रूप' में 'आत्मक' प्रत्यय जोड़कर बना शुद्ध विशेषण है, जो 'परिवर्तन' (संज्ञा) की प्रकृति बताता है — यह एक शुद्ध विशेषण-विशेष्य युग्म है।
अँधेरे युग: 'अँधेरे' शब्द मूल विशेषण 'अंधेरा' का रूप है, जो 'युग' (संज्ञा) की अवस्था बताता है — यह भी एक शुद्ध विशेषण-विशेष्य युग्म है।
आध्यात्मिक दुनिया: 'आध्यात्मिक' शब्द 'अध्यात्म' में 'इक' प्रत्यय जोड़कर बना शुद्ध विशेषण है, जो 'दुनिया' (संज्ञा) की प्रकृति बताता है — यह भी एक शुद्ध विशेषण-विशेष्य युग्म है।
मानव अस्तित्व: 'मानव' शब्द मूलतः एक संज्ञा है (जिसका अर्थ 'मनुष्य जाति' है), जो यहाँ 'अस्तित्व' (संज्ञा) से पहले आकर संबंध/वर्ग बताता है, गुण नहीं — अतः यह संज्ञा-संज्ञा संरचना है, विशेषण-विशेष्य युग्म नहीं।
तुलना एवं निष्कर्ष
'गुण/अवस्था/परिमाण बताता है या नहीं' — इस कसौटी पर रूपात्मक, अँधेरे और आध्यात्मिक तीनों खरे उतरते हैं, क्योंकि ये या तो प्रत्यय (आत्मक/इक) से बने हैं या मूल रूप से विशेषण हैं। 'मानव' इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि यह गुण नहीं बल्कि वर्ग/संबंध (मनुष्य जाति) बताने वाली मूल संज्ञा है।
अतः सही उत्तर 'मानव अस्तित्व' है — यही विशेषण-विशेष्य का उदाहरण नहीं है।