अधिगम संसाधनों के चयन में पहली संदर्शिका क्या होनी चाहिए?
2025
अधिगम संसाधनों के चयन में पहली संदर्शिका क्या होनी चाहिए?
Answer: C. विद्यार्थी की रुचियां एवं संदर्भ — संकल्पना: अधिगम संसाधन अधिगम का साधन है, स्वयं साध्य नहीं। अधिगमकर्ता-केंद्रित शिक्षाशास्त्र में — यही दृष्टि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) ने…
- A.
शिक्षक वरीयता
- B.
प्रौद्योगिकी उपलब्धता
- C.
विद्यार्थी की रुचियां एवं संदर्भ
- D.
सामग्री की लागत
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Correct answer: C
संकल्पना:
अधिगम संसाधन अधिगम का साधन है, स्वयं साध्य नहीं। अधिगमकर्ता-केंद्रित शिक्षाशास्त्र में — यही दृष्टि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) ने प्रस्तुत की और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने पुनः पुष्ट की — किसी भी संसाधन का शैक्षिक मूल्य इस बात से तय होता है कि वह अधिगमकर्ता से कितनी अच्छी तरह जुड़ता है: विद्यार्थी पहले से क्या जानता है, किसमें रुचि रखता है और अपने दैनिक जीवन में किन बातों का अनुभव करता है। इसलिए किसी भी अधिगम संसाधन के चयन में सर्वप्रथम लगने वाली कसौटी अधिगमकर्ता-प्रोफ़ाइल होती है; बजट, अवसंरचना और शिक्षक की सहजता जैसी व्यावहारिक बाध्यताएँ इसके बाद लगने वाले छननी-मानदंड हैं, जो पहले से इस कसौटी पर खरे उतरे संसाधनों में से अंतिम चयन कराते हैं।
अनुप्रयोग:
प्रश्न यह पूछता है कि अधिगम संसाधनों के चयन में सबसे पहले किस बात को मार्गदर्शक बनाया जाए। उपर्युक्त कसौटी के अनुसार चयन विद्यार्थी की रुचियों एवं संदर्भ से आरंभ होता है: शिक्षक पहले यह देखता है कि कक्षा पहले से क्या जानती है, किन बातों में उसकी रुचि जगती है, और उसका सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश कौन-सी सामग्री उपलब्ध कराता है। इस आधार पर चुना गया संसाधन नई विषयवस्तु को अर्थपूर्ण बनाता है, क्योंकि वह विद्यार्थी के पूर्व अनुभव से जुड़कर उसे आगे बढ़ाता है। ऐसे संसाधनों की पहचान हो जाने के बाद ही शिक्षक यह देखता है कि वे बजट में आते हैं या नहीं, विद्यालय के उपकरण उन्हें चला सकते हैं या नहीं, और उन्हें प्रयोग करने में वह स्वयं कितना सहज है।
प्रति-परीक्षण:
शिक्षक वरीयता — शिक्षक की अपनी परिचितता और सहजता; यह शिक्षक-दर-शिक्षक बदलती है और यह नहीं बताती कि पढ़ाया किसे जा रहा है, इसलिए इसे पहले रखने पर कक्षा चाहे जैसी हो, वही सामग्री दोहराई जा सकती है।
प्रौद्योगिकी उपलब्धता — अवसंरचना, जो यह सीमित करती है कि कौन-से प्रारूप व्यवहार में लाए जा सकते हैं; यह प्रस्तुति के माध्यम को बाँधती है, जबकि केवल चॉक, चार्ट या स्थानीय वस्तुओं से भी पाठ अधिगमकर्ता-केंद्रित हो सकता है।
सामग्री की लागत — प्रारंभिक सूची बनाते समय लगने वाली बजटीय बाध्यता; कम लागत वाला संसाधन भी तब नहीं पढ़ा पाता जब वह कक्षा के अनुभव से जुड़ता ही न हो।
विद्यार्थी की रुचियां एवं संदर्भ — दिए गए विकल्पों में एकमात्र ऐसी बात जो स्वयं विद्यार्थियों का वर्णन करती है, और इसी कारण अधिगमकर्ता-केंद्रित शिक्षाशास्त्र इसे सर्वप्रथम रखता है।
अतः अधिगम संसाधनों के चयन में पहली संदर्शिका विद्यार्थी की रुचियां एवं संदर्भ होनी चाहिए।