हिंदी भाषा की पाठ्य-पुस्तकों में हिंदीतर भाषाओं की रचनाओं को भी स्थान मिलना…

2021

हिंदी भाषा की पाठ्य-पुस्तकों में हिंदीतर भाषाओं की रचनाओं को भी स्थान मिलना चाहिए ताकि -

Answer: B. बच्चे हिंदीतर रचनाओं की भाषिक विशेषताओं से परिचित हो सकें।भाषा-शिक्षण के रचनावादी (constructivist) दृष्टिकोण में बहुभाषिकता को कक्षा के लिए एक संसाधन माना जाता है, बाधा नहीं। जब किसी भाषा की पाठ्यपुस्तक में अन्य…

  1. A.

    बच्चों को हिंदीतर रचनाकारों की जानकारी मिल जाए।

  2. B.

    बच्चे हिंदीतर रचनाओं की भाषिक विशेषताओं से परिचित हो सकें।

  3. C.

    बच्चे हिंदीतर भाषाओं पर अपनी पकड़ बना सकें।

  4. D.

    बच्चे हिंदीतर भाषाओं के व्याकरण से परिचित हो सकें।

Attempted by 5 students.

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Correct answer: B

भाषा-शिक्षण के रचनावादी (constructivist) दृष्टिकोण में बहुभाषिकता को कक्षा के लिए एक संसाधन माना जाता है, बाधा नहीं। जब किसी भाषा की पाठ्यपुस्तक में अन्य भाषाओं की रचनाएँ शामिल की जाती हैं, तो इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को भाषाओं की विविधता और उनकी भाषिक विशेषताओं — जैसे शब्द-प्रयोग, वाक्य-रचना और अभिव्यक्ति-शैली — से परिचित कराना होता है, न कि उन्हें उस भाषा में औपचारिक व्याकरणिक दक्षता या धाराप्रवाहिता दिलाना।

प्रस्तुत प्रश्न में हिंदी की पाठ्यपुस्तक में हिंदीतर भाषाओं की रचनाओं को शामिल करने का कारण पूछा गया है। उपर्युक्त सिद्धांत के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों को उन रचनाओं की भाषिक विशेषताओं से परिचित कराना है — अर्थात 'भाषिक-संरचना परिचय' (linguistic-feature exposure) की श्रेणी वाला विकल्प इस उद्देश्य को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

  • 'लेखक-परिचय' (रचनाकारों की जानकारी) पर केंद्रित विकल्प जीवनी-संबंधी सूचना देता है, जबकि पाठ्यपुस्तक में साहित्य शामिल करने का शैक्षणिक उद्देश्य भाषिक अनुभव देना है, लेखक-परिचय देना नहीं।

  • 'भाषा-प्रवीणता' (भाषा पर पकड़/धाराप्रवाहिता) पर केंद्रित विकल्प के लिए व्यवस्थित और सतत भाषा-अनुदेशन आवश्यक होता है; केवल कुछ रचनाओं से हुए परिचय मात्र से भाषा पर दक्षता अर्जित नहीं होती।

  • 'औपचारिक व्याकरण-शिक्षण' पर केंद्रित विकल्प रटंत व्याकरण-अनुवाद पद्धति (grammar-translation approach) की ओर संकेत करता है, जबकि रचनावादी भाषा-शिक्षण में साहित्य को भाषिक-सांस्कृतिक अनुभव के लिए शामिल किया जाता है, औपचारिक व्याकरण-नियम सिखाने के लिए नहीं।

अतः सही उत्तर वह विकल्प है जो बच्चों को हिंदीतर रचनाओं की भाषिक विशेषताओं से परिचित कराने पर केंद्रित है। (स्रोत: आधिकारिक CTET जनवरी 2021, पेपर-2 उत्तर कुंजी, सेट M)

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