हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :

2024

हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :

Answer: D. शिक्षा तथा उपाधियाँकिसी भी विषय-अध्यापक (जैसे हिंदी-अध्यापक) की "विशिष्ट" व्यावसायिक विशेषताएँ वे प्रत्यक्ष दक्षताएँ होती हैं जो विषय-ज्ञान और शिक्षण-कौशल से सीधे जुड़ी होती हैं…

  1. A.

    साहित्य का ज्ञान

  2. B.

    भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान

  3. C.

    हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार

  4. D.

    शिक्षा तथा उपाधियाँ

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Correct answer: D

किसी भी विषय-अध्यापक (जैसे हिंदी-अध्यापक) की "विशिष्ट" व्यावसायिक विशेषताएँ वे प्रत्यक्ष दक्षताएँ होती हैं जो विषय-ज्ञान और शिक्षण-कौशल से सीधे जुड़ी होती हैं — जैसे विषयवस्तु का गहन ज्ञान, शिक्षण-विधियों की समझ, तथा भाषा पर प्रभुत्व। इसके विपरीत, औपचारिक शिक्षा-योग्यता (डिग्री/उपाधि) एक सामान्य पात्रता-मानदंड है, न कि स्वयं में एक शिक्षण-दक्षता।

दिए गए विकल्पों में से साहित्य का ज्ञान, भाषा-शिक्षण की विधियों का ज्ञान, तथा हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों प्रत्यक्ष रूप से विषय-दक्षता और शिक्षण-कौशल दर्शाते हैं, इसलिए ये अध्यापक की विशिष्ट व्यावसायिक विशेषताएँ हैं। जबकि शिक्षा तथा उपाधियाँ केवल औपचारिक अर्हता (पात्रता) दर्शाती हैं — यह स्वयं में शिक्षण-कौशल या विषय-दक्षता का सूचक नहीं है, इसलिए यही वह विकल्प है जो "विशिष्ट विशेषताओं" में सम्मिलित नहीं है।

  • साहित्य का ज्ञान — विषयवस्तु की व्याख्या-क्षमता से जुड़ा प्रत्यक्ष विषय-कौशल है, अतः यह शामिल है।

  • भाषा-शिक्षण की विधियों का ज्ञान — कक्षा-शिक्षण की प्रक्रिया से जुड़ा प्रत्यक्ष कौशल है, अतः यह शामिल है।

  • हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — भाषा पर गहरी पकड़ को दर्शाता है, अतः यह शामिल है।

  • शिक्षा तथा उपाधियाँ — भर्ती/पात्रता की एक औपचारिक शर्त है, स्वयं शिक्षण-कौशल का सूचक नहीं, अतः यह अपवाद है।

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